महादेव ने विष को गले में क्यों रोका, अगर वह पी लेते तो क्या होता | यहां पढ़ें

GK In Hindi General Knowledge महादेव ने विष को गले में क्यों रोका, अगर वह पी लेते तो क्या होता : ये बात तो आप भी जानते हैं कि आधे से ज्यादा लोग भगवान शिव को अपना आराध्या मानते हैं ! उनकी दिल से पूजा करते हैं ! भगवान शिव के लिए कहा जाता है कि वो अपने भक्त का हमेशा साथ निभाते हैं और उनकी हर कामना को पूरा करते हैं ! शिव को भोला कहा जाता है, क्योंकि उनको गुस्सा कम आता है ! वहीं भगवान शिव को उनके भक्त कई नामों से पुकारते हैं !

महादेव ने विष को गले में क्यों रोका, अगर वह पी लेते तो क्या होता | यहां पढ़ें GK In Hindi General Knowledge

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कोई उन्हें भोले कहता है, तो कोई महादेव, तो कोई महेश ! शिव बहुत भोले हैं वे अपने भक्तों में कोई भेद नहीं करते हैं इसलिए उन्हें भोले कहते हैं ! साथ ही उन्हें प्रसन्न करने के लिए भी बाकी देवी देवताओं की तरह महंगी या दुर्लभ चीजों का चढ़ावा नहीं चढ़ाना पड़ता ! वो तो केवल एक कटोरी दुध या गंगाजल से ही मान जाते हैं ! भोले नाथ के बारे में कई कहानियां प्रचलित हैं, जिनको जो पूजा पाठ के दौरान पढ़ते हैं और मन को शांत करते हैं, लेकिन बेहद कम लोग है, जिनको उनकी विष पीने वाले कहानी के बारे में सच का पता नहीं !

भगवान शिव को निलकंठ भी कहा जाता है | GK In Hindi 

आज हम अपनी इस पोस्ट में उनके बारे में इसी बारे में बातने जा रहे हैं ! आपको बता दें कि भगवान के असंख्य नामों में एक नाम नीलकंठ भी है ! भोलेशंकर को नीलकंठ के नाम से भी जानते हैं ! आज आपको हम बताने जा रहे है कि भगवान शंकर के नीलकंठ नाम पड़ने के पीछे क्या कहानी है ! बताया जाता है कि जब समुद्र मंथन हो रहा था, तब समुद्र से कई अच्छी चीजों के साथ विष भी निकला था ! अच्छी चीजों के लिए असुर और सुर दोनों तैयार थे, लेकिन विष पीने के लिए कोई भी तैयार नहीं था !

विष पीते समय मां पार्वती ने पकड़ लिया था शिव का गला | General Knowledge 

GK In Hindi General Knowledge हैरानी की बात तो ये है कि उस विष की एक भी बूंद अगर पृथ्वी पर गिर जाती तो तबाही आ जाती ! ऐसे में भगवान शंकर ने लोगों की रक्षा करने के लिए समुद्र से निकले विष को पी लिया ! वहीं मां पार्वती ये देख समझ गईं कि भगवान शंकर के लिए विष घातक साबित हो सकता है ! इसलिए उन्होंने अपने हाथों से भगवान शंकर का गला पकड़ लिया और विष गले में ही रोक लिया ! विष के कारण भगवान शिव का गला नीला हो गया और इसलिए उन्हें नीलकंठ कहा जाने लगा !

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